बाबा महाकाल को एक लोटा केसरयुक्त जल अर्पित कर हुई रंगपंचमी उत्सव की शुरुआत। भस्म आरती में अर्पित किया गया टेसू के फूलों से बना एक लोटा हर्बल रंग। होली के दिन गर्भगृह में आग लगने की वजह से नहीं हुआ रंगों का इस्तेमाल। हर साल रंग लेकर मंदिर में आते थे भक्त, ब्रज की होली सा रहता था माहौल।


