प्रेमी के बहकावे में आने के बाद लड़की ने अपने पिता के खिलाफ ही रेप का मुकदमा दर्ज करा दिया और इसके बाद भोपाल के कोर्ट ने पीड़ित पिता को आजीवन कारावास की सजा भी सुना दी. इसके बाद पिता ने 12 साल जेल की सलाखों के पीछे काट दिए. लेकिन अब एमपी हाईकोर्ट ने भोपाल कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए पीड़ित पिता को रिहा करने का आदेश दिया है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘अभियोजन पक्ष योग्यता के आधार पर अपना केस स्थापित करने में पूरी तरह से विफल रहा है.’ पिता के वकील विवेक अग्रवाल ने हाईकोर्ट में बताया, ‘पीड़िता ने खुद अपने बयान में यह कहा है कि उसके पिता ने उसे प्रेमी के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिया था, जिसके बाद उन्होंने बहुत डांट लगाई थी.’
इसके बाद बेटी अपने प्रेमी के बहकावे में आकर अपने ही पिता के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज करा दिया और फिर भोपाल कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए पिता को आजीवन कारावास की सजा सुना दी. पिता ने साल 2013 में ही कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. पीड़ित पिता के वकील ने बताया कि पीड़िता ने कई बार अपने बयान बदले हैं.
साल 2012 में 21 मार्च को लड़की अपने नाना के साथ थाने पहुंची. इसके बाद उसने पुलिस को बताया कि 18 मार्च, 2012 को उसके पिता ने उसके साथ दुष्कर्म किया था. लड़की की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और चालान पेश किया. फिर सेशन कोर्ट ने 15 फरवरी, 2013 को पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.
