रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम । शासकीय नर्मदा महाविद्यालय के वाणिज्य विभाग द्वारा विकसित भारत लांच थीम आइडिया पोर्टल के अंतर्गत आज “संपन्न एवं सुदृढ़ अर्थव्यवस्था” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसका उद्देश्य भारतीय अर्थ और वित्त व्यवस्था से युवाओं को प्रत्यक्ष रुप से जोड़ना और भविष्य में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करना रहा। प्राचार्य डॉ ओ एन चौबे ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों में अवसर कहीं ज्यादा हैं आवश्यक। दृष्टिकोण बदलने की अब निवेश बढ़ाना और ऋण के बोझ को कम करना होगा । मुख्य वक्तव्य में डॉ सविता गुप्ता ने वोकल फाॅर लोकल के माध्यम से क्रय शक्ति बढ़ाने की बात रखी ।उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को रोजगार के बहुत अवसर मिलते हैं किंतु जोखिम के कारण वे स्वरोजगार का साहस नहीं कर पाते और जानकारी के अभाव में सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभ नहीं ले पाते। डॉ. के. जी. मिश्र विशिष्ट वक्तव्य में बोले कि आर्थिक असमानता देश को कमजोर करती है धन का वितरण समान हो। विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ धनार्जन भी हो ऐसी शिक्षा दी जानी चाहिए। सरकारी नौकरियों से अर्थव्यवस्था कभी भी संपन्न नहीं हो सकती। संयोजक डॉ हंसा व्यास ने परंपरागत ज्ञान और कौशल को प्रौद्योगिकी के साथ जोड़कर भारत को विकसित एवं संपन्न राष्ट्र बनाने पर अपना वक्तव्य केंद्रित किया। उनके अनुसार सुदृढ राजनीतिक व्यवस्था और मजबूत प्रशासनिक ढांचे से ही भारत को सक्षम बनाया जा सकता है। विभागाध्यक्ष डॉ. एस. सी. हर्णे ने अपने संबोधन में कृषि, अधोसंरचना और सेवाक्षेत्र की उन्नति को भारत के विकास में महत्वपूर्ण बताया।उन्होंने स्टार्टअप और मेक इन इंडिया को युवाओं के सशक्तिकरण का माध्यम बताया। डॉ मालती पटेल ने विकसित भारत 2047 विज़न में अर्थव्यवस्था के आधार पांच प्रमुख क्षेत्रों पर प्रकाश डाला। जिसमें आई टी सेक्टर, स्वास्थ्य एवं बीमा, रियल स्टेट ऑटोमोबाइल, सौर नवीनीकरण ऊर्जा के क्षेत्र प्रमुख रहे। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ दिनेश श्रीवास्तव ने कहा कि रोटी कपड़ा और मकान बुनियादी आवश्यकतायें हैं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में विकास की जरूरत है। अधिकार के साथ कर्तव्य को भी पूरा करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने एल पी जी मॉडल की बात भी कही। आभार व्यक्त करते डॉ प्रीति उदयपुरे ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को सम्पन्न बनाने के लिये घरेलू सकल उत्पाद को बढ़ाना होगा। खुशी साहू, मेघा वर्मा, अभय, भूमिका विश्वकर्मा,काजल कुमारी , शिवांक दुबे, मयंक वाधवानी नें भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने नारी सशक्तिकरण ,नारी शिक्षा , स्वास्थ्य ,सुरक्षा एवं शिक्षा, आर्थिक स्थिति, प्रौद्योगिकी और अधोसंरचना विषयों पर अपने विचार रखें । कार्यक्रम में डॉ मीना कीर, डॉ आर एस बोहरे, प्रो जी पी रैकवार, डॉ केशव मिश्रा, डॉ रौशनी थापक, डॉ नीता वर्मा, श्रीमती चेतना पवार, श्रीमती रीना सक्सेना, उमेश सेन,एस के झा, सहित अत्यधिक संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।


