कटनी। वीरांगना रानी दुर्गावती शासकीय महाविद्यालय बहोरीबंद में व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत आत्मनिर्भर स्वावलंबी एवं स्वरोजगार स्थापित करने के लिए स्नातक स्तर के विद्यार्थियों को जैविक खेती का प्रशिक्षण जैविक कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे द्वारा दिया जा रहा है। कम लागत तकनीकी प्राकृतिक एवं जैविक खेती जीरो बजट फार्मिंग द्वारा ग्राम में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर जैविक खाद एवं कीटनाशकों को बनाकर फसलों में उपयोग कर अधिक उत्पादन प्राप्त करने की तकनीकी जानकारी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी क्रम में जैविक कीटनाशकों के अंतर्गत गोमूत्र नीम पत्ती निंबोली पांच पत्ती काढ़ा निमास्त्र ब्रह्मास्त्र आग्नेयास्त्र दस परणीय अर्क दवा तथा शीघ्र खादों के अंतर्गत मटका खाद जीवामृत संजीवक बीज अमृत बिजामृत एवं पंचगव्य बनाने की विधि एवं फसलों में प्रयोग करने की तकनीकी जानकारी दी गई। पंचगव्य बनाने के लिए गाय का गोबर गोमूत्र दूध दही घी की निर्धारित मात्रा को एक प्लास्टिक के ड्रम में 15 दिन तक रखकर दिन में दो बार डंडे से हिलाते हैं। इसके तीन प्रतिशत घोल से बीज जड़ एवं कंद उपचार फल पेड़ एवं पौधों तथा फसल पर छिड़काव बीज भंडारण एवं सिंचाई पानी के साथ खेत में प्रवाहित करके फसल उत्पादन में वृद्धि के लिए उपयोग करते हैं। यह प्रशिक्षण प्राचार्य इंद्र कुमार पटेल के मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण समन्वयक मंजू द्विवेदी तथा विवेक चौबे के सहयोग से दिया जा रहा है।


