VIDEO तीन पीढियों से देश सेवा में समर्पित है परिवार
विगत तीन पीढ़ियों से देश प्रेम एवं देश सेवा में समर्पित जिले के ढीमरखेड़ा तहसील के ग्राम सिलौड़ी में
जन्में परिवार के अंतिम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री चंद्रभान राय, 03.09.2023 को 91 वर्ष की आयु में पंचतत्वों में
विलीन हो गये। श्री चंद्रभान राय जी मां भारती के लाड़ले सपूत एवं कटनी जिले आखिरी स्वतंत्रता संग्राम
सेनानी थे। श्री राय के निधन से समूचे क्षेत्र में शोक व्याप्त है। श्री राय को राज्य शासन की परम्परा के अनुसार
राजकीय रूप से अंतिम श्रद्धांजलि देते हुए, ग्वारीघाट मुक्तिधाम, जबलपुर में गार्ड आफ आनर दिया गया। श्री
राय राष्ट्रपति सम्मान से सुशोभित स्वतंत्रता सेनानी थे।
स्व. श्री चंद्रभान राय के पिता स्व. श्री रघुनाथ प्रसाद राय जी भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, जो कि
दिनांक 23.08.1942 से 24.12.1942 तक तथा सन 1930 से 1942 तक भूमिगत सेनानी रहे। अपने पिता से
विरासत में प्राप्त देशभक्ति की भावना को कायम रखते हुए श्री चंद्रभान राय भी भारत में आजादी के बाद भी
गोवा, दमन और दीप में पुर्तकाली शासन को खत्म करने के लिये अखिल भारतीय समिति ने गोवा मुक्ति
आंदोलन में सम्मिलित हुए, उक्त आंदोलन का श्री गणेश 15 जून 1955 से किया गया । इस समिति की स्थापना
जबलपुर में भी हुई जिसके मंत्री प्रोफेसर एम जी ताम्रकार थे। गोवा मुक्ति आंदोलन में 12 जुलाई 1955 से 02
अक्टूबर तक मध्यप्रदेश मे 15 जत्थों में 78 सत्याग्रही थे जिसमें जबलपुर जिले के 46 जबलपुर से 29 कटनी से
16 और सिहोरा से 01 सत्याग्रह किया गया । जबलपुर से आठ सदस्यी प्रथम जत्था गोवा सत्याग्रह में भाग लेने
11 जुलाई 1955 को रवाना हुआ जिसमें सर्व श्री श्रमिक नेता श्री महेन्द्र बाजपेयी, श्री रामचरण रैकवार, श्री
चन्द्रभान राय · श्री केदारनाथ पुरोहित थे। गोवा प्रस्थान करते समय नगर में सभी सत्याग्रहियों का जगह-जगह
स्त्री पुरूषों द्वारा तिलक लगाकर फूल मालाओं से स्वागत किया गया और एक बडे जुलूस ने मुंबई मेल से
सत्याग्रहियों को सम्मान के साथ रवाना किया।
12 जुलाई 1955 को पूणे में गोबा विमोचन समिति कार्यालय में बाहर से आने वाले सभी सत्याग्रहियों के
नाम, पते, आयु की जानकारी लिखी गई जिसमें जबलपुर जत्थे में श्री चन्द्रभान राय की आयु मात्र 13 वर्ष होने
कारण इन्हें सत्याग्रह करने भेजने केंद्रीय समिति सहमत नहीं थी, किन्तु श्री राय की जिद पर व्यक्तिगत
जिम्मेदारी का हल्फनामा लेकर श्री सी मन्नाडेकर छुलिया (महाराष्ट्र) वालों के साथ पूणे से रवाना हुये।
16 जुलाई 1955 को सभी 108 सत्याग्रही नेबदा ग्राम से गोवा सीमा में निहत्थे प्रवेश हुये और राष्ट्रीय
ध्वज फहराते हुए नागझिरी चौकी पहुंचे वहां पर मिलिट्री पुर्तगालियों ने सत्याग्रहियों को चेतावनी देते हुए रोका
और सभी की तलाशी ली फिर हरी भरी बांस की लकडियों से बंदूक के कुन्दों से, ईंट की ठोकरों से तब तक
पिटाई की जब तक मुंह से आवाज निकलना बंद नहीं हुई। होश में आने पर अंतर्वस्त्र छोड़कर सभी कपडे
उतरवा लिये और सामान छीनकर नागझिरी चौकी ले जाकर मिलिट्री कोट में पेश किया और 20 – 20 साल का
कठोर कारावास की सजा सुनाई। इन सत्याग्रहियों को पहाडी से धक्का दे दिया, उन्हें पकडकर हंटर से पीटते
थे जब तक कि वे बेहोश न हो जाये । सीमा पर से 17 जुलाई 1955 को सभी सत्याग्रहियों को भारतीय मिलिट्री
द्वारा भरती किया गया जिसमें श्री चन्द्रभान राय, श्री रामचरण रैकवार, श्री भोले नाथ पुरोहित थे। सभी समाचार
पत्रों में और रेडियो प्रसारण में यह खबर फैली कि ये तीनों गोवा मुक्ति आंदोलन में शहीद हो गये लेकिन
डाक्टरों के प्रयास से 2 जुलाई 1955 को इन तीनों को होश आया, घायल अवस्था में ही जबलपुर के सभी
सेनानी गृह नगर वापिस लौटे और यहां वर्षों इलाज चला तब कहीं ठीक हो पाये । इस प्रकार गोवा विमोचन
समिति के आह्वान पर तत्कालीन जबलपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र सिलौड़ी से मात्र एक वीर सेनानी गोवा मुक्ति
आंदोलन में शामिल हुये थे।
यही नहीं अपने अग्रज के पदचिन्हों पर चलते हुए श्री राय के अनुज डॉ. प्रतापभानू राय जिनके द्वारा
लिखित पुस्तक जंग-ए-आजादी जबलपुर जो कि 15 अगस्त 2004 में रवीन्द्र भवन भोपाल में सम्माननीय
मुख्यमंत्री उमा भारती जी, राज्यपाल बलराम जाखड द्वारा विमोचित की गयी । उक्त पुस्तक में गोवा विमोचन
समिति की साहसी वीर गाथा का उद्यरण किया गया है। श्री राय द्वारा देश के प्रति अपने समर्पण भाव का
परिचय प्राप्त होता है। श्री राय पूरा परिवार समाज सेवा में विगत तीन पीढ़ियों से अनवरत् निःस्वार्थ भाव से
समर्पित है। वर्तमान में इस परिवार की तीसरी पीढी की बहू जिला पंचायत सदस्य श्रीमति कविता पंकज राय जो
ऐसे देशभक्त परिवार से आते है सहज सरल और विनम्र है। हमारे जिले की जनसेवा में तत्पर है।


