विदिशा जिला ब्यूरो मुकेश चतुर्वेदी
*गंजबासौदा।* मानव सेवा अभियान के अंतर्गत भोजन पद्धति पर आधारित सात दिवसीय विशेष आवासीय स्वास्थ्य शिविर गुरुवार से प्रारंभ हो गया। यह आवासीय शिविर आगामी 9 अगस्त तक स्थानीय मानस भवन में आयोजित रहेगा। स्वास्थ्य शिविर में शामिल होने के लिए मध्यप्रदेश के अलावा विभिन्न राज्यों से डेढ़ सौ से अधिक शिविरार्थियों ने पंजीयन कराया है।
गुरुवार को जिला पंचायत अध्यक्ष एवं सांसद प्रतिनिधि कैलाश रघुवंशी, नगर पालिका अध्यक्ष शशि अनिल यादव, नागरिक सेवा समिति के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साधक कांति भाई शाह, वरिष्ठ साधिका सुनीता भावसार, सरिता रघुवंशी, वरिष्ठ साधक अशोक चौरसिया, रघुनाथ सिंह रघुवंशी, केशव ताम्रकार विदिशा एवं अखिल भारतीय रघुवंशी क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष और अभियान के संयोजक दिगपाल सिंह रघुवंशी एवं मेरठ से आए इंटरनेशनल एसोसिएशन फोर साइंटिफिक स्प्रिचुअलिज्म (आइएएस) के वरिष्ठ साधक और मुख्य मार्गदर्शक वक्ता डॉ गोपाल शास्त्री ने शिविर के शुभारंभ मौके पर मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण कर शुभारंभ किया। अपने उद्बोधन में अतिथियों ने कहा कि स्वास्थ्य शरीर में ही स्वस्थ मन निवास करता है जब हमारा शरीर बीमारियों से ग्रस्त होगा तो हम कोई भी कार्य सही तरीके से नहीं कर सकते। आज हम अपने व्यापार, पहनावे और अपने भविष्य की तो चिंता कर रहे हैं लेकिन हमें अपने शरीर को किस तरह स्वस्थ रखना है इसके प्रति सजग नहीं है। प्रकृति द्वारा दिए गए प्राकृतिक भोजन को अनदेखा कर बाजार में बिक रहे फास्ट फूड जैसी अन्य खाद्य-पदार्थों खाकर हम अपने शरीर को बीमारियों का घर बना रहे हैं। यही वजह है कि आज अनियमित दिनचर्या एवं फास्ट फूड के कारण शुगर, बीपी, मोटापा, हाइपरटेंशन, कैंसर जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन वीरेंद्र शर्मा ने किया जबकि अतिथियों का स्वागत वरिष्ठ साधिका सीमा शर्मा, मीनाक्षी माथुर,योगिता राजपूत एवं वरिष्ठ साधक, देवसिंह लोधी, ओपी दुबे एवं रणवीर सिंह रघुवंशी ने किया। अतिथियों ने इस तरह के शिविरों की आवश्यकता पर जोर दिया और आयोजकों को बधाई दी। शिविर में मध्यप्रदेश के अलावा अन्य अन्य राज्यों से आए साधक भी सहभागिता कर रहे हैं।
*सब्जियों के सूप और कच्चे भोजन से हुई शिविर की शुरुआत*
सात दिवसीय आवासीय स्वास्थ्य शिविर में पूरा फोकस प्राकृतिक भोजन पर रहता है। शिविर के दौरान शिविरार्थी अपने खान पान में बदलाव कर प्राकृतिक भोजन के जरिए ही इन 7 दिनों में अपने बीपी शुगर वजन में अंतर देखता है। हल्के व्यायाम,योग के जरिए सुबह की दिनचर्या की शुरुआत होती है। व्यायाम और व्याख्यान सत्र के बाद साधकों को सभी तरह की सीजनल सब्जियों से बना हुआ सूप दिया गया। दोपहर को कच्ची सब्जियां का मुरब्बा,(बिना पका हुआ भोजन), हरी पत्तियों की चटनी और कच्ची लौकी और खजूर का हलवा दिया गया। इसके बाद शाम को पका भोजन दिया गया।


