कटनी जिले की जनपद पंचायत बहोरिबंद अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत छपरा में अनेक मार्बल खदाने है जिसके वेस्ट मटेरियल (अधिभार) में से सफ़ेद मार्बल पत्थर का ओवरलोड और अवैध परिवहन किया जा रहा है। मार्बल खदान से सबसे ज्यादा राजस्व कर सरकार को प्राप्त होता है। लेकिन पंचायत के विकास के लिए पंचायत को कुछ नहीं मिलता है, जबकि पर्यावरण आकलन में मार्बल खदान के मालिक द्वारा ग्राम विकास में सालाना कम से कम 10लाख से 12लाख रूपये राशी खर्च करने को कहा गया था।
गांव में जल संकट
गाव में सभी मार्बल खदाने 600 से 700 फुट गहरी है जिसके कारण गाव में जल संकट गहरा गया है। छपरा गाव के जलाशय (तलाब) से चार गाव में सिचाई का जल पहुँचता था उस जलाशय से 40 से 50 मीटर की दुरी पर 4 खदाने अत्यधिक गहरी है जिसके कारण जलाशय में पानी नहीं है। और खदान खुली पड़ी है और खतरनाक विस्फोटक के उपयोग से जमीन में दरारे हो गई जिससे जलस्तर गहरी खदानों की ओर चला गया। विस्फोटक के उपयोग से जंगली जानवर भाग गये और कुछ की मृत्यु हो गई। गाँव के पशु पानी पीने की लालच में खुली खदानों में गिर कर मर रहे है खुली पड़ी खदानों में सीमा सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है।
वेस्ट मटेरियल भी बेच रहे
खदान संचालक अपना पैसा बनाकर चले गए और गाँव को मरने के लिए अधर में छोड दिया। जो संचालक बचे है वह अपने फायदे के लिए वेस्ट डंप मटेरियल से पत्थर तोड़कर 17 टन की लोडिंग क्षमता वाले वाहन में 40 टन खनिज परिवहन कर रहे है। जिसकी रायल्टी भी नहीं होती है उक्त पत्थर को व्हाइट सीमेंट और पुट्टी बनाने वाली कम्पनी में 750 रु. टन के हिशाब से बेचा जा रहा है यह वही वेस्ट मटेरियल है, जिसको खदानों में वापस पुराई करने को कहा गया था। हजारो वृक्ष लगाने का वादा करने वाले खदान संचालक पूरा जंगल तहस-नहस कर चले गए और जवाबदार अधिकारी आँखे बंद करके बैठे है।
यह था वादा
अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए एवं पर्यावरण आकलन प्राप्त करने के लिए संचालको द्वारा पंचायत को निम्न वादे किये गये।
सामाजिक और आर्थिक उत्थान, उच्च शिक्षा और योग्य विघ्यार्थी को प्रोत्साहन, उत्तम पर्यावरण एवं वृक्ष रोपण करना, जल की उत्तम व्यवस्था और पानी फील्टर का निर्माण करना, प्राथमिक उपचार, ग्रामीणों को रोजगार, गरीबो को सालाना कपडे, महिला एवं बाल विकास में सहयोग, गौ सेवा करना, गाँव में शौचालय और पेशाबघरो का निर्माण, गाँव की सडको का मरम्मत कार्य, सार्वजानिक भवन, स्थलों के मरम्मत कार्य, धार्मिक कार्यो में सहयोग करना, जन सुविधा एवं मदद, इन सब कार्यो का लिखित वादा करने वाले खदान संचालक पैसे कमाकर फुर्र हो गये और उनके गुर्गे डंप का पत्थर खुलेआम बेच रहे
मत लगाओ नाका
अब ग्रामीणों के आग्रह पर जब पंचायत ने आय के स्त्रोतों में बढ़ावा करने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया तो अधिकारियो द्वारा नाका हटाने का दबाव दिया जा रहा है। जबकि पंचायत ने पूरी तरह ग्राम विकास के लिए नियमों का पालन करते हुए बकायदा प्रस्ताव पारित कर नाका लगाया ताकि भारी वाहनों के कारण जो सड़कों को क्षति हो रही है उसकी भरपाई के लिए कुछ राशि एकत्र कर सड़कों की दशा सुधारी जा सके। लेकिन ग्राम पंचायत द्वारा नाका लगाए जाने के बाद स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी सरपंच एवं ग्रामीणों पर नाका हटाने के लिए दबाव बना रहे हैं। ग्रामीणों को बदहाली की ओर धकेलने वाले जिम्मेदार अधिकारी शायद गांव का भला ही नहीं चाहते।


