रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम । जिला मुख्यालय की नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम में पूर्व परिषद के कार्यकाल में प्रधानमंत्री आवास योजना में हुए घोटाले की गूंज प्रदेश स्तर पर खत्म नहीं हुई है । नई परिषद का गठन होने के बाद भी यह मामला गले की फांस बना हुआ है। इस मामले में निरंतर मीडिया की सुर्खियों में रहे नगर पालिका से मार्च 2023 में सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री रमेश चंद्र शुक्ला आज भी प्रधानमंत्री आवास योजना में हुए घोटाले से सुलझ नहीं सके हैं? इस मामले की शिकायत जागरूक नागरिक ग्वालटोली निवासी भवानी गौर द्वारा सिटी कोतवाली सहित वरिष्ठ आला अधिकारियों तक की गई थी जिसके उपरांत उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की गई है। इस गंभीर मामले में अब हाईकोर्ट ने वस्तुस्थिति मांगी है। जिसके तहत अब नर्मदापुरम एसडीओपी पराग सैनी के दिशा निर्देशन में पुलिस द्वारा जॉच की जा रही है। पुलिस द्वारा पीएम आवास योजना से जुड़े हुए अधिकारी कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। पिछले करीब तीन दिनों से एसडीओपी कार्यालय में पीएम आवास योजना से जुड़े हुए अधिकारी कर्मचारियों के बयान लिए जा रहे हैं। करीब 12 से 15 नगरपालिका के अधिकारी कर्मचारियों के बयान दर्ज हो चुके हैं। शिकायतकर्ता भवानी गौर द्वारा गंभीर आरोप लगाए हैं कि सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री रमेश चंद्र शुक्ला द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत फर्जी आईडी बनाकर पीएफएमएस पोर्टल से करोड़ों का गबन कर अपात्र लिए लोगों को योजना का लाभ दिया गया है और पीएम आवास की महत्वपूर्ण फाइलें गायब कराई गई हैं। आज आश्चर्य का विषय है कि भाजपा शासित नगरपालिका में हुए पीएम आवास योजना के घोटाले को लेकर विपक्ष की भूमिका निभाने वाली कांग्रेस भी इस विषय को लेकर मौन हैं। शिकायतकर्ता भवानी गौर का कहना है कि वर्ष 2017 में वार्ड क्रमांक 33 के निवासी होकर पीएम आवास योजना के लिए उन्होंने आवेदन किया था। जिस पर सहायक यंत्री रमेश चंद्र शुक्ला जो पीएम आवास योजना के प्रभारी थे, उनके द्वारा उनको योजना में प्राप्त होने वाली राशि से वंचित रखा गया। जिसकी उन्होंने शिकायतें भी की, सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो बताया गया कि उनकी फाइल कहीं गुम हो गई है,अन्य दस्तावेज प्रदान किए। शिकायतकर्ता भवानी गौर ने अपनी शिकायत में अवगत कराया कि नगरीय प्रशासन भोपाल द्वारा 14 जून 2021 को गठित जांच दल द्वारा जो प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, उसमें इस बात का भी खुलासा किया गया है कि 75 ऐसे हितग्राहियों को 2 लाख 50 हज़ार से अधिक की राशि का भुगतान किया गया। केवल 574 अनुमोदित हितग्राहियों का अटैचमेंट पोर्टल पर पाया गया तथा 1024 हितग्राही बगैर कलेक्टर अनुमोदन के पाए गए।जिसमें इस बात का भी खुलासा किया कि 259 हितग्राहियों को 03 करोड़ 53 लाख 92 हज़ार रुपए का अनियमित भुगतान किया गया। विभाग द्वारा जांच प्रतिवेदन के अनुसार हितग्राहियों की पृथक पृथक फाइलें तैयार होने और उक्त फाइलों के गुम जाने के संबंध में पीएम आवास योजना प्रभारी सहायक यंत्री रमेश चंद्र शुक्ला को जिम्मेदार माना गया। सीएमओ नगर पालिका परिषद के समक्ष भ्रत्य प्रीति परते,लेखापाल विनोद रावत द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार प्रीति परते द्वारा स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि उनके नाम की फर्जी आईडी बनाकर पीएफएमएस पोर्टल से करोड़ों रुपए का अनियमित भुगतान किया गया। इसी प्रकार
लेखापाल विनोद रावत द्वारा भी लिखित आवेदन 04 फ़रवरी 2021 के अनुसार आरसी शुक्ला द्वारा स्वयं के मोबाइल नंबर व मेल आईडी से विनोद रावत की फर्जी आईडी तैयार की गई एवं बगैर कलेक्टर अनुमोदन के अनियमित भुगतान किया गया।जिसके संबंध में सीएमओ होशंगाबाद द्वारा 11फरवरी 2021 को सहायक यंत्री एवं प्रधानमंत्री आवास नोडल रमेश चंद्र शुक्ला को अनियमितताओं के संबंध में नोटिस जारी किया गया परंतु उनके द्वारा कोई लिखित उत्तर स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। शिकायतकर्ता भवानी गौर ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि सहायक यंत्री रमेश चंद शुक्ला द्वारा दस्तावेजों में हेरफेर कर कूटरचना कर अन्य कर्मचारियों के नाम की फर्जी आईडी बनाकर करोड़ों रुपए का गबन किया है तथा फर्जी आईडी के रूप में साइबर एक्ट का अपराध किया गया है। जिससे प्रार्थी को आज दिनांक तक प्राप्त प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका । जांच कर रहे एसडीओपी पराग सैनी ने बताया कि हमारे पास प्रधानमंत्री आवास योजना में हुई गड़बड़ी को लेकर शिकायत की गई है। इस मामले में हाईकोर्ट द्वारा जवाब मांगा गया है। शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। नगर पालिका नर्मदापुरम में पीएम आवास योजना का काम देखने वाले संबंधित कर्मचारियो को बुलाकर उनके बयान लिए जा रहे हैं। जानकारी उजागर नहीं की जा सकती है। यह गंभीर विषय है, हमें न्यायालय में जवाब प्रस्तुत करना है। नगर पालिका सीएमओ नवनीत पांडे ने बताया कि पीएम आवास योजना से संबंधित मामले की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। पुलिस द्वारा जो जानकारी हमसे मांगी गई है वह उपलब्ध कराई जा रही है। मामले की जांच उच्च न्यायालय के निर्देश पर चल रही है।
