सीमा कैथवास की रिपोर्ट
नर्मदापुरम। संभागीय उपायुक्त जनजातीय विभाग नर्मदापुरम संभाग जेपी यादव ने बीटीआई रोड स्थित ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय विद्यालय के विद्यार्थियों के साथ परीक्षा पूर्व चर्चा की । कक्षा 10वीं एवं 12वीं के उपस्थित विद्यार्थियों से उन्होंने कहा की कोई भी परीक्षा आखिरी परीक्षा नहीं है। परीक्षा की अच्छी तैयारी करें और बिना डरे परीक्षा में सम्मिलित हों। अगर कोई प्रश्न पत्र ठीक से नहीं हुआ है तो चिंता ना करें अगले प्रश्न पत्र की तैयारी करें। डर तभी लगता है जब हमारी तैयारी कमजोर होती हैं।कोई भी समस्या बड़ी नही होती। समस्याओं का आकार कोशिशों के आकार पर निर्भर करता है। यदि हमारी कोशिश से बड़ी होती है तो बड़ी से बड़ी समस्या छोटी लगने लगती है और उसका समाधान हो जाता है। अगर हमारी कोशिश बड़ी होती है तो छोटी समस्या भी बड़ी लगने लगती है। जीवन को सफल बनाना है तो कोशिशों का आकार बड़ा बनाना होगा, क्योंकि समस्याओं का आकार मन की स्थिति पर निर्भर होता हैं। मन को हार के लिए नही जीत के लिए तैयार करना चाहिए, क्योंकि मन के हारे हार है मन के जीते जीत।
उन्होंने बच्चों को समय के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि समय अमूल्य है, और सीमित है।कितना भी धनवान हो समय के एक छोटे से पल को नही खरीद सकता, जो समय का सदुपयोग करता है, वह जीवन को सरल, आसान और आनंदमय बनाता है। जो समय चला जाता है वह लौटकर नहीं आता। अगर हम सही समय प्रबंधन ठीक कर लें तो दिनचर्या आसान होकर सब काम समय पर हो जाते हैं। ऐसा करके हम तनाव से बच सकते हैं। हर विषय के हर चैप्टर को गहराई से अध्ययन करना है, पढ़ाई केवल नंबरों की दौड़ नहीं है, ठोस ज्ञान पर आधारित नींव मजबूत होती है। पर प्रयास नहीं करते हैं तो परीक्षा में आने वाले प्रश्न पत्र को सबसे पहले पूर्ण रूप से पढ़ें और तय करें कि किन प्रश्नों का उत्तर आपको सबसे अच्छा आता है, उसी क्रम से उत्तर लिखें। ऐसा प्रयास करें कि कोई भी प्रश्न छूटे ना। अच्छे और सटीक उत्तर कैसे लिखे जाते हैं इसके लिए गत वर्षों में मेरिट में आए विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं का अवलोकन करें। परीक्षा के दिनों मे पर्याप्त नींद लेना भी ज़रूरी है, शरीर को थकाना नही है। एकाग्र होकर नियमित रूप से तैयारी करें।इस समय स्वास्थ्य का जरूर ध्यान रखें, बीमार होने पर पूरे वर्ष की मेहनत बेकार हो जाती है। घबराने और हार मानने की ज़रूरत नही हैं। जीवन मे कितनी ही बार असफल हो जाए , फिर भी हार नहीं मानना है। जो हार नही मानता उसी को जीत नसीब होती हैं,क्योंकि मन के हारे हार है और मन के जीते जीत। यह ज़रूर है की सफलता एक दिन में नहीं मिलती , लेकिन निरंतर प्रयासों से एक दिन सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने कविता ” लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, और कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। ” बच्चों के साथ गाकर उन्हें प्रेरित किया। आज का काम कल पर टालने से बोझ बढ़ता है, और तनाव बढ़ता है, घबराहट होती,इसलिए रोज का काम रोज करने की आदत डालना चाहिए। लाखों बच्चों की किस्मत मे पढ़ाई नही होती है, आप खुशकिस्मत हैं की आपको जीवन को बेहतर बनाने का अवसर मिला है। आपने माता पिता के त्याग और उम्मीदों पर खरे उतरने का प्रयास करें, इससे न केवल वे ख़ुश होंगे बल्कि आपका जीवन भी ख़ुशहाल होगा । श्री यादव ने बच्चों से कहा कि जीवन में आत्म अनुशासन का बड़ा महत्व है। आत्म अनुशासन के बिना जीवन बिन मांझी की पतवार के सामान है। राह भटकने पर ज़िन्दगी भटक जाती है। इसलिए अपने को भटकाव से बचाएं। जीवन को बेहतर बनाने के लिए समय कम है।किसी अन्य से तुलना ना करके स्वयं से प्रतियोगिता कर अपने को बेहतर बनाना होगा। उन्होंने कहा कि माता-पिता लगभग सभी के अच्छे होते हैं, लेकिन बच्चे बहुत कम लोगों अच्छे होते हैं। माता-पिता का त्याग का प्रतिफल आपकी सफलता पर निर्भर है। श्री यादव ने कहा की यह ज़रूरी नही की सबको सरकारी नौकरी ही मिले पर यह ज़रूर है की अगर आपकी कोशिशें सकारात्मक रही तो आपके हाथों मे जरूर कोई ना कोई काम होगा। जीवन मे निराश होने की ज़रूरत नही है,बल्कि होंसला बनाये रखने की ज़रूरत है। जिंदगी में ठोकरे लगती हैं, लेकिन गिरकर उठने और फिर चल पढ़ने से मंजिल प्राप्त होती है। जीवन मे समस्याएं हमे बर्बाद करने नही, बल्कि हमे मज़बूत और बेहतर बनने के लिए बेहतरीन कोशिश करने की प्रेरणा देती हैं। कभी जब मंज़िल की दौड़ से पीछे रह जाओ तो होंसला नही खोना, विश्वास बनाये रखना है, आज पीछे है तो कल आगे भी हो जायेंगे। श्री यादव ने “रुक जाना नहीं तू कहीं हार के ” जैसे प्रेरणा गीत भी सुनाये। श्री यादव ने कहा की महान लोग बड़े घरों मे पैदा नही होते, वे तो संघर्ष से पैदा हैं। श्री यादव ने बच्चों की जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा सुनहरे भविष्य के लिए बच्चों को शुभकामनाएं प्रदान की। कार्यक्रम मे प्राचार्य श्री हरगोविंद दुबे, संस्था के शिक्षक भी उपस्थित रहे रहे।
